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प्राचीन यूनानी भाषा रहस्य

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लगभग 1,000 यूनानी शब्द किसी भी इंडो-यूरोपीय भाषा तक नहीं traced जा सकते, जिनमें quintessential शब्द जैसे λαβύρινθος (labýrinthos) 'लेब्रिंथ', ἔλαια (elaía) 'ऑलिव', Ἀχιλλεύς (Akhilleús) 'अकिलीज', Ὀδυσσεύς (Odysseús) 'उडिसियस', Κόρινθος (Kórinthos) 'कोरिंथ', Ἀθῆναι (Athênai) 'एथेंस', Ἀθήνη (Athḗnē) 'अथेना', और Ἄρης (Árēs) 'एरेस' शामिल हैं। दशकों के शोध के बावजूद, भाषा विज्ञानियों ने इन शब्दों को प्रोटो-इंडो-यूरोपीय या पड़ोसी भाषाओं से नहीं जोड़ा है। लेख में यह परिकल्पना की गई है कि ये शब्दावली अवशेष नेolithic कृषि समाजों द्वारा बोली जाने वाली Paleo-European (पुराना यूरोप) भाषाओं से आए हैं। जब प्रारंभिक हेलिनिक भाषा के बोलने वाले Pontic–Caspian Steppe से पूर्वी भूमध्यसागर में migrated, तो उन्हें अज्ञात flora, fauna और terrain का सामना करना पड़ा—जैसे जैतून, अंजीर, साइप्रस और समुद्र—और उन्होंने क्षेत्र के substrate भाषाओं से शब्दों को अपनाया या अनुकूलित किया। इस substratum के प्रभाव ने प्राचीन यूनानी पर एक स्थायी छाप छोड़ी, जिससे इंडो-यूरोपीय superstrate के नीचे एक खोई हुई भाषा परत के अवशेष बचे। इस रहस्यमय भाषा का संबंध Paleo-European भाषाओं जैसे एट्रूस्कन या इबेरियन से हो सकता है, हालांकि बास्क भाषा इस प्राचीन भाषा परत की एकमात्र बची हुई वंशज है।