डीपवाटर हॉरिजन तेल रिग पर हुए विस्फोट से मेक्सिको की खाड़ी में 40 लाख बैरल से अधिक तेल फैलने के 16 साल बाद भी गहरे समुद्र का जीवन ठीक नहीं हुआ है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि 2010 की आपदा के बाद के शुरुआती वर्षों में आक्टोपस, स्क्विड, क्रिल, झींगा और लैंटर्नफिश की आबादी में कम से कम 60 प्रतिशत की गिरावट आई। यह शोध मेक्सिको की खाड़ी के एक विस्तृत क्षेत्र में ध्वनिक सर्वेक्षणों और हज़ारों जाल-नमूनों पर आधारित है, जिसमें गहरे समुद्र के जीवन में वापसी के बहुत कम प्रमाण मिले।
प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ में प्रकाशित इस अध्ययन ने इन नुकसानों को समुद्र की उस परत में पशु जीवन की "सबसे तेज़ और सबसे गंभीर" गिरावट बताया है, जो लगभग 600 फुट की गहराई से दो मील से भी अधिक नीचे तक फैली है। शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष नहीं दिया कि तेल रिसाव ही इस गिरावट का कारण था, लेकिन उन्होंने इसे "सबसे संभावित व्याख्या" कहा।
आपदा के बाद वैज्ञानिकों को गहरे पानी में स्क्विड और आक्टोपस के मांस तथा मछली के अंडों में तेल से जुड़े यौगिक मिले हैं। उनका कहना है कि इस प्रदूषण से प्रजनन और विकास बाधित हो सकता है या समय से पहले मृत्यु हो सकती है। लगातार बना रहने वाला प्रदूषण उन गहरे समुद्री मछलियों के लिए साथी खोजना भी कठिन बना सकता है, जो गंध की अपनी संवेदना पर निर्भर रहती हैं।
आबादी की संख्या में गिरावट के अलावा अध्ययन में आनुवंशिक विविधता में भी कुछ कमी पाई गई। लेखकों ने चेतावनी दी है कि इन आबादी में तेज़ी से बदलती दुनिया में जीवित रहने के लिए ज़रूरी आनुवंशिक गुणों की कमी हो सकती है।
स्रोत: Hacker News · HeadlinesBriefing द्वारा सारांशित