अधिकांश आधुनिक कारों में बैकअप कैमरा पहले से ही लगा होता है, जिससे भीड़ वाले क्षेत्रों में समानांत पार्किंग और पीछे जाना आसान और सुरक्षित हो जाता है। पुरानी वाहनों के लिए, बाजार में मिलने वाले बैकअप कैमरा एक उपयोगी अपग्रेड हैं। तारों वाले इंस्टॉलेशन में जटिल काम शामिल होता है और इसकी कीमत $600 से अधिक हो सकती है, जबकि वायरलेस बैकअप कैमरा की कीमत $40 से अधिक हो सकती है और बिना पेशेवर मदद के इंस्टॉल किए जा सकते हैं।
वायरलेस बैकअप कैमरा आमतौर पर गाड़ी रिवर्स में डालने पर अपने-आप सक्रिय हो जाते हैं, हालांकि कुछ बैटरी से चालित मॉडल में स्मार्टफोन ऐप खोलने की आवश्यकता होती है। ये वायरलेस कैमरा डैशबोर्ड मॉनीटर पर रियल-टाइम वीडियो भेजने के लिए वाई-फाई, डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी या पुराने ब्लूटूथ सिस्टम का उपयोग करते हैं। कैमरा वाहन की टेल लाइट सर्किट या एक बिल्ट-इन सोलर पावर्ड बैटरी से शक्ति लेता है, जबकि मॉनीटर यूएसबी पोर्ट ये सिगरेट लाइटर से शक्ती लेता है।
सिस्टम वीडियो फुटेज को हॉरिजॉंटल रूप से फ्लिप करके रियरव्यू मिरर व्यू को मिरर करता है और विस्तृत दृश्य के लिए वाइड-एंगल या फिश-आइ लेंस का उपयोग करता है। हालांकि, बाजार में मिलने वाले कैमरा में नए वाहनों में मिलने वाली उन्नत सुविधाएं जैसे पार्किंग सेंसर और ऑब्जेक्ट डिटेक्शन नहीं होती हैं। ये कैमरा संकुचन के कारण थोड़ी देर, सिग्नल इंटरफेरेंस औे कम वीडियो रिजॉल्यूशन भी हो सकते हैं।
इन सीमाओं के बावजूद, वायरलेस बैकअप कैमरा पुरानी कारों में पीछे की दृश्य को बेहतर बनाने के लिए एक व्यावहारिक और किफायती तरीका प्रदान करते हैं, जिससे तारों वाले इंस्टॉलेशन की अधिक लागत और जटिलता के बिना ही रियल-टाइम वीडियो फीडबैक मिलता है।
स्रोत: Engadget · HeadlinesBriefing द्वारा सारांशित