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ईरान संघर्ष के बाद चीन की ऊर्जा प्रभुता

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ईरान के साथ युद्ध ने चीन की वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भूरपोलिटिक शक्ति को उजागर किया। आलिया और रिफाइनिंग क्षमता के विस्तार से, चीन ने दुर्बलता को शक्ति में बदल दिया। संघर्ष के दौरान, चीन ने पड़ोसी देशों को ईंधन आपूर्ति में कमी लगा दी, जिससे एक नई प्रभावशीलता दर्शाई गई जो पारंपरिक रूप से जैसे सउदी अरब जैसे निर्यातक देशों द्वारा रखी जाती थी। इस परिवर्तन से चीन को कम ईंधन की असुरक्षा के साथ आक्रामक रणनीतियों को अपनाने की अनुमति मिलती है। चीन की आयात में कमी लाने की क्षमता ने उद्योग को अचंभित कर दिया। यह एक ऐसा मुख्य कारण है जिसके कारण सदीवीय तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें इतनी अधिक नहीं बढ़ीं। चीन की विशाल रिफाइनिंग क्षमता और विविध ऊर्जा स्रोतों ने युद्ध के पहले छह महीनों में तेल खरीदारी में 23% की कमी संभव कराई। अन्य मध्य पूर्व के सम्पूर्ण देशों को अधिक लागत या ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ा। दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनर के रूप में, चीन अब ऊर्जा निर्यात को एक राजनैतिक उपकरण के रूप में उपयोग करता है। यह देश विदेशी कच्चे तेल पर निर्भर करता है लेकिन सप्लाई को बचाने और विपकीय दुश्मनों के साथ मिलने के लिए रिफाइन्ड ईंधन निर्यात को नियंत्रित करता है। इस नई शक्ति गतिशीलता को वैश्विक ऊर्जा राजनैतिक विचार को ढालने की क्षमता है। अगले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मीटिंग चीन के इस प्रभाव को कैसे उपयोग करता है, यह पता चल सकता है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि चीन भविष्य में ऊर्जा को प्रभाव के रूप में उपयोग करने से बचेगा नहीं।

चीन की ऊर्जा वृद्धि के प्रमुख कारकों में रणणीतिक तेल आलिया, विस्तारित रिफाइनिंग क्षमता और कोईला और वैकल्पिक ऊर्जा में निवेश शामिल हैं। देश के रिफाइन्ड ईंधन निर्यात पर नियंत्रण इसे एक अनूठी राजनैतिक प्रभाव देता है जो लोकतंत्र देशों में अभाव है। यह परिवर्तन चीन के ऊर्जा सुरक्षा और भूरपोलिटिक आक्रमण के संबंध में वैश्विक रणनीति निर्णय लेने के तरीके में गहरा बदलाव लाता है।

महत्वपूर्ण घटक: कंपनियाँ: Goldman Sachs | व्यक्तियों: Rebecca F. Elliott, Keith Bradsher, Julian Gewirtz, Erica Downs, Daan Struyven, President Trump, Xi Jinping | स्थान: Jiujiang, China, Beijing and Shanghai, New York, Strait of Hormuz, Taiwan, White House